Wednesday, November 22, 2017

गाँधी परिवार की मानसिक दासता से ग्रसित कांग्रेस

कांग्रेस के एक ट्विटर हैंडल ने एक फोटो पोस्ट कर मोदी को चायवाला बोलकर नीचा दिखाने का प्रयास किया क्योंकि कॉंग्रेसियों की समस्या ये है कि वो मानसिक रूप से गांधी परिवार की दासता से ग्रसित हैं, न कोई आत्मसम्मान है न ही देश के प्रति निष्ठा,

यदि कुछ है, तो वो है अपने स्वामी गांधी परिवार की चाटुकारिता की चाह और बदले में पारितोषिक की आस, और ये एक भावना इतनी प्रबल है कि इसके अतिरिक्त कांग्रेसियों को कुछ सूझता ही नहीं है, 
70 साल से काँग्रेसी इसी गांधी परिवार की गुलामी पीढ़ी दर पीढ़ी करते रहे हैं, और गांधी परिवार पूरी क्षमता से इस देश को व् जनता को लूटकर अर्जित किया धन का एक अंश अपने इन गुलामों को सदैव उपलब्ध करवाते आया है, इसीलिए देश व् समाज के हितों से इन काँग्रेसी गुलामों का कभी कोई सरोकार नहीं रहा, अतः ये निरंतर न केवल राष्ट्रीय हितों से समझौता करते रहे, अपितु निजी लाभ हेतु बढ़ चढ़ कर देश को अत्यधिक क्षति पहुंचाने का प्रयास करते रहे, कांग्रेसियों को केवल गांधी परिवार द्वारा फेंकी गयी मलाई चाटने व् लूट के एक हिस्से से मिली बोटियाँ चबाने व् चचोड़ने में आनंद आता है, इनका न कोई अपना विवेक होता है व् न ही कोई राजनीतिक निर्णय क्षमता, केवल गांधी परिवार का आदेश ही इनके लिए सर्वोपरि है और ये उस गांधी परिवार को आज भी देश का राजपरिवार समझते हैं, और यदि कोई भी प्रतिद्वंदी गांधी परिवार के सामने आ खड़ा होता है तो ये मानसिक गुलामी से ग्रस्त काँग्रेसी उसपर गन्दे से गन्दे हमले करते हैं और नीचता की पराकाष्ठा का प्रदर्शन करने से नहीं हिचकते, 

आज समस्या ये है कि एक गरीब परिवार से आया व्यक्ति जो पूर्ण रूप से ईमानदार है जिसने कभी निजी आर्थिक लाभ हेतु कोई अनैतिक कार्य नहीं किया है, जबसे प्रधानमंत्री बना है एक दिन की छुट्टी नहीं ली, तीन वर्ष में एक भी वित्तीय अनियमितता या घोटाला नहीं किया, उस व्यक्ति को चायवाला बोलकर काँग्रेसी अपमानित करने का प्रयास कर रहे हैं, ये दर्शाता है कि इन काँग्रेसी गुलामों का मानसिक स्तर इतना विकृत है कि एक गांधी परिवार के अलावा ये किसी को सम्मान नहीं दे सकते, और जिस प्रकार की शब्दावली का प्रयोग देश के प्रधानमंत्री के लिए किया है तो अनुमान लगाया जा सकता है कि आप और हम जैसे साधारण नागरिक को तो ये मनुष्य नही पशु तुल्य ही समझते होंगे।

Wednesday, October 11, 2017

पटाखों के बाद हिन्दुओं के अंतिम संस्कार पर रोक: सेक्युलर देश में चुन-चुनकर हिन्दुओं के अस्तित्व पर आक्रमण

दिवाली पर पटाखों की बिक्री प्रतिबंधित करने के बाद अब NGT(नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल) हिंदुओं के अंतिम संस्कार पर प्रतिबंध की मांग कर रहा है,
हवाला वही है "प्रदूषण", ये एक सोची समझी रणनीति है जिसमे लेफ्ट लिब्रल सेक्युलर गैंग कोर्ट में PIL से शुरुआत करता है, और समाज में विभिन्न पदों व् स्थानों में बैठे उनके सहयोगी उसके पक्ष में एक वातावरण बनाना आरम्भ कर देते हैं, बुद्धिजीवी कहलाये जाने वाले बड़े-बड़े लेख लिखते हैं, मिडिया की चर्चाओं में 4:1 के अनुपात का पैनल बैठाकर दर्शकों को भृमित किया जाता है, सोशल मीडिया पे विरोध करने वालों को रूढ़िवादी, संघी, घोषित करना आरम्भ हो जाता है, और अंत में न्यायालय में बैठे माननीय जज साहब अपना निर्णय सुना देते हैं, और सहिष्णु हिन्दू समाज बिना प्रश्न तर्क व् विरोध के निर्णय स्वीकार कर लेता हैं,

नदियों में दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन की परंपरा को ऐसे ही ध्वस्त किया गया था कि प्रदूषण हो रहा है, किन्तु सैंकड़ों शहरों का हजारों लीटर मल-जल, सैंकड़ों फैक्ट्रियों का विषाक्त जल प्रतिदिन नदियों में गिराया जाता है जिससे कोर्ट के अनुसार कोई प्रदूषण नहीं होता,

दिवाली पर पटाखों की बिक्री पर प्रतिबंध की बात भी आयी है किन्तु ईद, न्यू ईयर, वैवाहिक कार्यक्रमों, IPL, क्रिकेट के अलावा अन्य खेल आयोजनों में पटाखों की बिक्री व् प्रयोग पर कोई प्रतिबन्ध नहीं है, न ही कोर्ट को वह प्रदूषण दिखाई देता है,

दही हांडी की ऊंचाई सुरक्षा की दुहाई देकर कोर्ट सुनिश्चित करता हैं, किन्तु मुहर्रम पर 2-2 वर्ष के बच्चों के माथे पर चीरा लगाकर खून निकालते मुस्लिम कोर्ट को नहीं दिखते

जल्लीकट्टू में जानवरों के संग क्रूरता की बात कहकर कोर्ट प्रतिबन्ध लगा देता है, किन्तु बकरीद पर करोड़ों जानवरों को तड़पा-तड़पा कर हलाल किया जाना कोर्ट के अनुसार कोई क्रूरता नहीं अपितु पशु को चर्म आनंद की अनुभूति करवाना है, व् करोड़ों मृत पशु के अंदरूनी अंग व् उसका खून जिसका कोई निस्तारण का प्रबंध नहीं होता उससे हुआ प्रदूषण व् बीमारी फैलने की संभावना कोर्ट को नहीं दिखती, दिखते हैं तो केवल हिंदुओं के त्यौहार।

होली जलाने पर पेड़ों की कटाई दिख जाती है, किन्तु क्रिसमस पर करोड़ों हरे पेड़ों की कटाई नहीं दिखती, होली खेलने पर जल की बर्बादी होती है किन्तु करोड़ों लीटर जल बकरीद पर काटे गए करोड़ों जानवरों के मांस को धोने में बर्बाद नहीं होता,

ये है हमारा प्रगतिशील देश और ये है यहाँ के नियम व् न्याय व्यवस्था, और जिस प्रकार से घटनाएं घटित हो रही है, मुझे तथागत रॉय की बात सच होती दिख रही है, और हिन्दू वो सहिष्णु समाज है कि अंतिम संस्कार पर प्रतिबंध भी चुपचाप स्वीकार कर लेगा,

मुझे ऐसा इसलिए भी लगता है क्योंकि 1947 में धर्म के आधार पर बंटवारा होने के बाद जब हिन्दू कोड बिल आया उसमे निर्णय हुआ की हिन्दू एक ही पत्नी रखेगा, डिवोर्स में महिला को सम्पत्ति में अधिकार व् गुजारा भत्ता देय होगा, हिंदुओं के विवाह करने की आयु निश्चित कर दी गयी, किन्तु मुस्लिमों को चार बीवी, मौखिक तलाक, बिना किसी सम्पत्ति व् गुजारा भत्ते के और नाबालिग लड़कियों से शादी का अधिकार दिया गया, हिंदुओं ने इसका मुखर होकर विरोध नहीं किया,

हिंदुओं की धार्मिक यात्राओं पर टैक्स लगा दिया गया और मुसलमानों को उनकी हज यात्रा पर सरकारें हिंदुओं के टैक्स के पैसों से भेजती रहीं, हिन्दू चुपचाप देखता रहा

हिंदुओं के मंदिरों और मंदिरों की संपत्तियों पर सरकार ने बोर्ड बनवाकर कब्जा कर लिया किन्तु ईसाईयों के चर्च और इस्लामिक मस्जिदों व् दरगाहों पर ऐसी कोई बाध्यता नहीं लागू की गयी, उन्हें पूर्ण स्वतंत्रता दी गयी,

हिंदुओं की धार्मिक संस्थाओं को स्कूल गुरुकुल खोलने चलाने और  धार्मिक शिक्षा देने से प्रतिबंधित कर दिया गया, किन्तु चर्च और इस्लामिक संगठनों को मदरसों में धार्मिक शिक्षा देने पर कोई रोक नहीं लगाई गई,

जब कम्युनल वायलेंस बिल आया जो किसी भी दंगे या हिंसा में हिंदुओं को छोड़कर सभी धर्म के लोगों को निरपराध घोषित करता था, उसका भी अधिकांश हिंदुओं ने विरोध नहीं किया था, व् अंधश्रद्धा बिल जो हिंदुओं के धार्मिक अनुष्ठानों को ही प्रतिबंधित करने जा रहा था उसका भी हिंदुओं ने विरोध नहीं किया था,

हिंदुओं के एक छोटे से वर्ग को छोड़कर किसी ने इन निर्णयों व् सौतेले व्यवहार का विरोध नहीं किया, और जिन्होंने विरोध किया उन्हें गोडसे-सावरकर का अनुयायी घोषित करने की मुहिम चला दी गयी, दुर्भाग्य ये है कि हिंदुओं पर, उनकी आस्था पर, उनके समाज पर और अब हिंदुओं के अस्तित्व पर निरंतर आक्रमण हो रहे हैं, और हिन्दू है कि शुतुरमुर्ग के समान अपना सर जमीन में घुसाये बैठा है, ये सोचकर की ये सेक्युलर देश है, सरकार और कोर्ट उसकी रक्षा करेंगे, किन्तु वो भूल चुका है जो स्वयं अपनी सहायता नहीं करता कोई उसकी सहायता को आगे नहीं आता।

Thursday, August 17, 2017

क्या भारत चीन से टकराने में सक्षम नहीं है, आईये परखते हैं की ये कितना सत्य है ?

बहुत से पत्रकार ये विचार फैलाने में लगे हैं की यदि भारत चीन का युद्ध हुआ तो भारत चीन से लड़ने में सक्षम नहीं है, किंतु ध्यान देने योग्य बात ये है की इन पत्रकारों को न तो सैन्य रणनीति का ज्ञान है, न भारत-चीन की थल व् जल  सीमाओं की भौगोलिक परिस्थितियों का, इनमें से कइयों ने तो आज तक LAC (लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल) भी नही देखी है, युद्ध की नीतियों व् सामान्य  नियमों से ये पूर्णतः अनभिज्ञ  है, 
सत्य ये है की चीन की जल,थल व् वायु सेना अनुभवहीन है, युद्ध में चीन छोटे से देश वियतनाम से और 1967  में  भारत से हार चुका है, अब यहाँ मैं केवल भारत को रक्षात्मक भूमिका में रखकर चीन द्वारा थोपे गए युद्ध के समय भारत की क्षमता को आज की परिस्थितियों के परिपेक्ष्य  में  रखकर आपसे परिचित करवाने का प्रयास कर रहा हूँ,

आज की युद्ध-नीति का नियम है की  रक्षात्मक मुद्रा में बैठी सेना से जीतने हेतु 9:1 के रेशियो की आवश्यकता होती है, अर्थार्थ हर एक रक्षात्मक सैनिक के लिए 9 आक्रमणकारी सैनिक चाहिए, भारत ने करीब 1.5 लाख सैनिक चीन सीमा पर तैनात कर रखे हैं, जिसका मतलब उनसे निपटने के लिए चीन को 13.5 लाख सैनिक चाहिए, जो आंकड़ा चीन के पास नहीं है, इसके अलावा भारत ने दो माउंटेन डिविजन डोकलाम में लगा रखी है, और यहाँ भारतीय सेना ऊँचाई पर बैठी है जिसका सीधा रणनीतिक लाभ भारत को है,

चीन अपनी आवश्यकता का 80% तेल आयात करता है जो अंडमान के पास मलक्का स्ट्रेट से जाता है जो मात्र 1.7 किमी चौड़ा है और अंडमान में भारत का नौसैनिक अड्डा है, जहाँ यदि भारतीय नेवी ब्लॉकेड कर दे तो चीन तेल की एक एक बूँद के लिए मोहताज हो जायेगा और केवल अपने उसी तेल पर निर्भर रहेगा को उसने संग्रह कर के रख छोड़ा होगा, और तेल के अभाव में कोई भी सेना लम्बे समय तक युद्ध नहीं लड़ सकती,

चीन यदि मिसाइलों व् वायुसेना का प्रयोग करता है तो फिर सीधा युद्ध होगा जिसमे भारत विश्व की सबसे तीव्रतम क्रूज़ मिसाइल ब्रह्मोस का प्रयोग करेगा जो ध्वनि की गति से 3.5 गुना अधिक तेज है जिसकी रेंज MTCR के सदस्य बनने के बाद भारत दोगुनी कर चुका है जिसे केवल विश्व में एक ही मिसाइल रोक सकती है बराक-8 जो केवल भारत व् इसराइल के पास है, और ब्रह्मोस किसी भी आगे बढती सैन्य टुकड़ी, जहाज  व् एयरक्राफ़्ट कैरियर तक को नष्ट कर सकती है, इसके अलावा भारत प्रहार, पृथ्वी-II,पृथ्वी-III,शौर्य, अग्नि-I,अग्नि-II,अग्नि-III,अग्नि-IV जैसी घातक मिसाइलों से चीन के शहरों पर भी आक्रमण कर सकता है, ध्यान देने की बात ये हैं की चीन के पास कोई बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम नहीं है,

चीनी हवाई हमलों,  मिसाइलों व्  युद्धक विमानों के लिए भारतीय सेना के पास पर्याप्त  संख्या में स्टिंगर, बराक-8, आकाश, S-125, S-200, 9K33 Osa, 9K35 Strela-10, 9K22 Tunguska, SA-18 Grouse जैसी मिसाइल हैं, जो चीन के हवाई आक्रमण से निपटने में सक्षम हैं, यह स्थिति तब की है यदि भारत वायु सेना का प्रयोग न करे, यदि वायु सेना युद्ध में उतरती है तो MIG21, MIG29, Sukhoi30-MKI, MIRAGE-2000 जैसे युद्धक विमान विश्व के सर्वाधिक ट्रेंड भारतीय पायलट्स के हाथों में इतने घातक तो हैं ही की भारतीय एयरस्पेस से चीन के विमानों का सकुशल वापस जाना असंभव बना दें 

इंडियन ओशन क्षेत्र में  P8i व् MIG29K जैसे एयरक्राफ्ट, आईएनएस विक्रमादित्य जैसे एयरक्राफ्ट कैरियर, आईएनएस चक्र, आईएनएस अरिहंत, आईएनएस चक्र, सिंधुघोष, शिशुमार क्लास की न्यूक्लियर व् कन्वेंशनल सबमरीन, कोलकाता, दिल्ली व् राजपूत क्लास के डीस्ट्रॉयर, शिवालिक, तलवार, ब्रह्मपुत्र व् गोदावरी क्लास के फ्रिगेट्स व्  बराक-8, सागरिका, K-4 व् ब्रह्मोस से लैस  भारतीय नेवी की स्थिति सिर्फ इस बात से समझ लीजिये की इस जल क्षेत्र से भारतीय नेवी इतनी भली प्रकार परिचित है अमेरिकी नेवी से युद्ध अभ्यास में पलड़ा बराबरी का रहा था,


अंत में यदि स्थिति परमाणु युद्ध तक आई तो भारत व् चीन दोनों के प्रमुख शहर एक दूसरे की मिसाइलों की जद में हैं और दोनों ही परमाणु शक्ति सम्पन्न देश हैं और चीन भली प्रकार जनता है की भारत के पास सेकेंड स्ट्राइक की क्षमता है अर्थार्त भारत समुद्र में कहीं से भी अपनी पनडुब्बी से परमाणु मिसाइल सागरिका या K-4 का प्रयोग कर सकता है

चीन की अर्थव्यवस्था निर्यात पर निर्भर हैं और लगभग सभी देश चीन के सस्ते कम गुणवत्ता वाले उत्पादों के कारण व्यापार घाटे से त्रस्त हैं, और इस समय अमेरिका, ब्रिटेन, फ़्रांस, जर्मनी, जापान व् लगभग संपूर्ण यूरोप जो चीन के लिए एक बड़े बाजार की तरह है वो भारत के साथ है, 
युद्ध की दशा में ये देश चीन पर आर्थिक प्रतिबन्ध लगा सकते हैं जिससे चीनी अर्थव्यवस्था की कमर टूटना तय है, पश्चिमी देशों व् अमेरिका के भारत से घनिष्ठ होते सम्बन्धों को देखकर एक बात से इंकार नहीं किया जा सकता की चीन से सीधे युद्ध की स्थिति में नाटो फोर्सेस भारत के पक्ष में युद्ध कर सकती है, ऐसी स्थिति में चीन के पास केवल पाकिस्तान और नार्थ कोरिया जैसे सहयोगी होंगे और आर्थिक संकट से जूझ रहा रूस तटस्थ भूमिका में रहेगा,

मिडिया, पत्रकार बुद्धिजीवी स्वघोषित विश्लेषक चाहे कुछ भी दावे कर लें किन्तु यथार्थ यही है की भारत चीनी आक्रमण से निपटने में व् चीन को गम्भीर व् भारी क्षति पहुँचाने में पूर्ण रूप से सक्षम है और चीन भी भली प्रकार जानता है की भारत से युद्ध में जो आर्थिक क्षति उसे पहुंचेगी वो उसकी अर्थव्यवस्था के लिए न केवल घातक सिद्ध होगी, अपीतु चीन के अपने आपको आर्थिक महाशक्ति के रूप में देखने के स्वप्न को सदैव के लिए चकनाचूर कर देगी, और दूसरी ओर चीन की कम्युनिस्ट पार्टी जो एक प्रोपगैंडा के अंतर्गत अपने को सर्वशक्तिमान दिखाकर लोकतंत्र की मांग करने वालों के हौसलों का आजतक दमन करती आई है उसके लिए युद्ध के उपरांत उठ खड़े होने वाली लोकतंत्र की मांग और बगावत से निपटना बहोत कठिन होगा और सम्भव है चीन में गृहयुद्ध की स्थिति आ जाये और आर्थिक संकट से पीड़ित चीन सोवियत संघ की तरह कई टुकड़ों में टूट जाये

लेखक: रोहन शर्मा

Sunday, July 16, 2017

मैं क्यों भाजपा को वोट देता हूँ, और कब तक वोट दूंगा ?

मैं इस देश का सामान्य सा मिडिल क्लास नागरिक हूँ, किसी पार्टी या नेता से कोई सम्बन्ध नहीं है, न ही किसी दक्षिणपंथ की ओर झुकाव है न ही वामपंथ की ओर, हाँ भारतीय राजनीति व् इतिहास को अवश्य बारीकी से अध्ययन किया है, और उसीके सबक मेरे दृष्टिकोण और विचारों के स्तम्भ है,

मुग़ल आक्रांताओं को पढ़ा है उनके अत्याचार पढ़े हैं, मुग़लों द्वारा वैदिक धर्म के करोड़ों अनुयायियों के जनसंहार और सोमनाथ,काशी, मथुरा, अयोध्या जैसे सहस्त्रों धर्मस्थलों का मुग़लों द्वारा किया गया भंजन पढ़ा हैं, अंग्रेजों के शासन को पढ़ा है, गांधी की अपरिपक्व हठधर्मिता व् तर्कहीन अहिंसा पढ़ी है व् छद्म सेक्युलरिज़्म पढ़ा है, सत्ता व् काम लोलुपता से ग्रस्त नेहरू व् इंदिरा को पढ़ा है, युद्ध में विजयश्री को आलिंगनबद्ध करने के पश्चात वार्ताओं में देश की पराजय को पढ़ा है, कांग्रेस का बड़ा पेड़ गिरने पे सिखों पर उसका दुष्परिणाम पढ़ा है, हिन्दू विरोधी सोनिया राज व् कांग्रेस का लूटतंत्र देखा है, शर्म अल शेख का वक्तव्य सुना है, इस्लामिक आतंकियों का महिमामंडन व् हिंदुओं पर मिथ्या आरोप लगाकर उन्हें आतंकी सिद्ध करने का प्रयास देखा है,

कश्मीर, कैराना, केरल, असम, बंगाल में हिंदुओं की दुर्दशा व् नरसंहार देखे है, यूनियन कार्बाइट के एंडरसन जैसे हजारों के हत्यारे को सम्मानपुर्वक छोड़े जाना पढ़ा है, शाहबानो पर न्यायालय के निर्णय को कलंकित करना पढ़ा है, एक देश में दो प्रकार के पर्सनल कानून देख रहा हूँ, एक वर्ग की धार्मिक यात्राओं पर टैक्स व् दूसरे मजहब को मजहबी यात्रा पर सब्सिडी देख रहा हूँ,

दलित की बेटी द्वारा सरकारी खर्च पर बनवायी गयी हजारों करोड़ रुपयों की मूर्तियों व् उसी दलित की बेटी के सैंडल लाने चार्टेड प्लेन का इस्तेमाल देखा है, समाजवाद के नाम पर सैफई महोत्सव की अय्याशियां देखि है, गरीबों के मसीहा द्वारा जानवरों का चारा खा जाना व् उसके बाकि परिवार का भू माफीया वाला रूप देखा है, एक मुख्यमंत्री द्वारा एक महिला आतंकी को राज्य की बेटी घोषित करते भी देखा है, बंगाल के कम्यूनिसटों द्वारा निर्दोषों के रक्त से खेली होलियां भी देखि है और 62 के युद्ध में कम्युनिस्टों द्वारा शत्रु का समर्थन भी पढ़ा है, धर्मनिरपेक्षता के नाम पर घोर साम्प्रदायिकता समर्थन व् अपराधी पक्ष का बचाव व् पीड़ित को दोषी सिद्ध करवाते देखा है, 2जी, कोयला, सैन्य, दामाद जी CWG घोटालों द्वारा जनता का खून चूसते नेता देखे है, आंदोलन के नाम पर निकल कर आये भृष्ट,मक्कार,झूठे, घोटालेबाज धूर्तों को देखा है, देश के लिए प्राण देने वाले सैनिकों को गालियां देते व् उनपर झूठे आरोप मढ़ते देखा है, मुम्बई हमला भी देखा है और सर्जिकल स्ट्राइक भी,

अब यदि कोई एक राजनितिक दल बचता है जो सेना को गालियां नहीं देता उलटे बिना सैन्य हथियारों की खरीद में कोई घोटाला किये, सेना को शीघ्र रक्षा उपकरणों को खरीदने का धन देता है तो वो भाजपा है,

कोई एक दल बचता है जो भारत के मूल निवासी सहिष्णु हिंदुओं,सिखों,बौद्धों,जैन के विरुद्ध दंगे नहीं करवाता, उनके नरसंहार नहीं करवाता तो वो भाजपा है,

यदि कोई एक दल बचता है जो सत्ता में होते हुए भी संघीय ढांचे का सम्मान कर व् संविधान की सीमाओं में रहकर देश को उन्नति पथ पर के जाने को कटिबद्ध है वो भाजपा है,

यदि कोई एक दल है जो मुस्लिम वोटों के लिए हिंदुओं,सिखों,बौद्धों, जैनों के अधिकारों का हनन नही करता वो भाजपा है,

यदि कोई दल है तो कश्मीर से धरा 370 हटाकर उसे भारत के अन्य राज्यों के समतुल्य लाने की बात करता है वो भाजपा है,

भारत के उत्तर पूर्व के विकास व् उसके महत्व को समझने व् उसके उत्थान हेतु ध्यान देने वाला दल भाजपा है,

बंगलदेशी घुसपैठियों को देश से बाहर निकालने की बात करने वाला दल भाजपा है,

पिछले 14 वर्षों में महंगाई को न्यूनतम स्तर पे लाने वाला, सरकारी खजाने की सब्सिडी की चोरी DBT द्वारा रोकने वाला, विदेशी मुद्रा भंडार में सर्वाधिक वृद्धि करने वाला दल भाजपा है

महत्वपूर्ण रक्षा उपकरणों का देश में निर्माण करवाने का कदम उठाने वाला दल भाजपा है, जीवनरक्षक दवाओं के दाम घटाने वाला दल भाजपा है,

यदि आरक्षण के नाम पर समाज को तोड़ने की राजनीती न करने वाला कोई दल है तो भाजपा है,

माना कि भाजपा अत्यंत रक्षात्मक नीति का पालन कर रही है, गौरक्षकों जैसे व्यर्थ के विषयों पर छद्म अपराध बोध से ग्रसित है, आरक्षण जैसे कुप्रबंध को समाप्त करने में गम्भीर नहीं दिखती, केरल बंगाल में हिंदुओं की दुर्दशा पर राज्य सरकारों को भंग नही करती, धारा 370 पर लीक से हटकर अप्रत्याशित निर्णय नहीं ले रही,

किन्तु क्या देश की किसी भी अन्य मौजूद पार्टी से मैं आशा कर सकता हूँ की वो इन सब निर्णयों को कर देगी, व् भाजपा के समान ही कोई अनैतिक कार्य जैसे तुष्टिकरण, भ्र्ष्टाचार नहीं करेगी ? देश की अर्थव्यवस्था को हानि नहीं होने देगी, एक परिपक्व रक्षा व्  विदेश नीति, का पालन करेगी व् संघीय ढांचे व् संविधान के दायरे में रहकर कार्य करेगी, जनहित में कुशल निर्णय लेगी ?

यदि उत्तर है नहीं, तो मैं तब तक भाजपा को वोट देता रहूंगा जब तक वो अपनी इन्ही वर्तमान नीतियों का पालन करती रहती है, अपनी विचारधारा व् एजेंडे में कोई बड़ा देश व् समाज विरोधी बदलाव नहीं करती है, या जब तक भाजपा से अच्छा, सबल व् सशक्त, राष्ट्रवादी राजनीतिक दल नहीं जन्म ले लेता।

Tuesday, July 4, 2017

Is consolidation of Hindu votes unfair ?

India is a Hindu majority country where the trend of consolidation of Muslim votes in the garb of Islamic unity was started by imams of the mosques, before every election they give orders to vote for a party of their liking and specifically mention they are doing so to stop Hindu forces, and after election these imams extract the price through various "means" some times seat to Rajya Sabha, favors for the family business, seat of MLC, financial grants to family run NGO, appointment of the person of their liking on a "specific" post, or allotment of a land at throwaway price or on lease, or demand of "going slow" or quashing down some cases against family members or close friends.
 
But I haven't seen Pujari of any Temple ordering the worshipers to vote for party of his liking,

In 2014 for the first time Hindu votes consolidated and voted for the party which had uniform civil code in its agenda, the party which said we won’t carry out appeasement policies if voted to power, and when that party came to power and started acting on its policies mentioned in election manifesto to stop appeasement of muslims being carried out in the garb of secularism, liberals, intellectuals, Media mugals,rival politicians & Muslims have started objecting to it,

But issue is not that simple, to understand it we must take a look at the history of India which reveals Hindus have faced persecutions after persecutions, Muslim invaders and rulers have slaughtered lakhs and lakhs of Hindus, built minars(Towers) of their severed heads, killed little Hindu children used them as slaves, Hindu women were captured in masses raped, used as sex slaves in harems and even sold as commodity, forced conversion were carried out and jaziya tax was imposed on Hindus, basically Hindus were made second class citizens in their own country by muslims, lakhs of Hindu Temples and idols were destroyed and discredited by Muslims and mosques were built over them even the  Ayodhya Ram Temple, Kashi Shiv Temple, and Mathura krishna Temple were not spared by fanatically communal muslims.

Before Independence Muslims carried out large scale massacre of Hindus and butchered thousands of Hindus men women and children, and raped Hindu women from age of 70 to as young as 6 yrs old on “Direct Action Day” in demand of a separate Islamic republic, 
helpless Hindus witnessed their country being divided on the basis of a religion, a foreign religion which didn't even originated on Indian soil, it came to India through foreign arab Invaders, and grew on the pillars of rape, sex slavery of Hindu women and forced conversion of Hindu men, after the partition of India in 1947 Hindus in the newly formed Islamic country Pakistan also met the similar fate large scale carnage was carried out women raped children killed in front of their mothers, barbarism was of such level that breasts of the Hindu women were cut so they couldn't breastfeed their infants, trains full of corpses of Hindus and severed body parts were sent to India from Islamic republic of pakistan. 

on the other hand people of congress who grabbed power in India were suffering from Nehru-Gandhi syndrome and started unhealthy appeasement of the Muslims in the name of secularism and multiculturalism at the cost of Hindu rights, though partition took place on the basis of religion and Pakistan was created for the followers of Islam and rest of the India was supposed to be for Hindus, yet large number of Muslims were allowed to stay in Hindu majority India with full rights to practice and preach their religion, 

Indian Muslims demanded sharia based personal law, govt. gave them right to have 4 wives at a time, triple talaq, marrying girl as young as 16, even allowed Muslim to convert people into their religion, but Muslims used inappropriate means to carry out such activities like “forced conversion” and “love jihad” targeting young Hindu girls, which has outraged a large section of Hindu population,

India is the only country which sends Muslims on their pilgrimage (Hajj) on the cost of state exchequer, whereas Hindus pay taxes on their pilgrimage like Amarnath Yatra these discriminatory policies have irked Hindus in India,

Indian government even provides financial assistance to the Islamic madrasas which teaches Islam, treasury of Hindu temples are under Govt control but funding of mosques, dargahs and madrasas are not, 
Indian govt provides low interest loans to Muslims and and scholarships to Muslim students, 
such are the unfair policies carried out by successive governments, and the previous congress regime even went on to the extent of saying "Muslims have first right on the resources of India", they brought a draft of communal violence bill to persecute Hindus, and dissolved the strong anti-terror Law POTA when the Islamic terror was on the rise in India, 

India is world’s largest victim of Islamic terror, thousands of innocents Hindus have lost their lives because of Islamic terror,  intolerance among Muslim all across the globe is the reason they are always in the state of war with other communities and similar is the case in India, be it kashmir or kairana where carnage of Hindus was carried out by Muslims, rapes of Hindu women and girls was used as a weapon to spread panic among Hindus, fearing for their lives and security of their women Hindus were forced to leave their houses their property their land their livelihood and become a refugee in their own country, 
similar practices are being carried out at present in states like west Bengal and Kerala, every riot in India has involvement of Muslims in it and almost every riot is initiated by Muslims and there are very few cases when culprits faced law and punished,

Time and again  Indian govts have shielded the culprits of communal riots in the garb of secularism, and tried to suppress such issues and left Hindus deprived of Justice, even the liberal-intellectual class didn’t raised these issues and the media carried out crass communal agenda to malign Hindus, conceal facts, spin the stories and avoiding the issues which didn’t suit its agenda, this has not only emboldened the radical criminal elements in Muslim community but on the other hand also spread a sense of disappointment and insecurity among Hindus

These are the reasons Hindus from all across the country consolidated and unanimously voted for BJP the only party which spoke against appeasement policies of previous government and gave Hindus a hope of security, If today Hindu vote has consolidated it didn’t happen overnight, factors issues and Injustice suffered by Hindus mentioned above took years to reach this stage and newly arrived platform social media played a vital role in this process, due to its reach it became as a parallel news medium, and acted as antidote to the agendas of paid media,

And now when people call it unfair that Hindu votes have consolidated its actually unfair on their part and reveals their hypocrisy because when all such above mentioned discrimination and crimes were going on against such a large tolerant and peaceful population of Hindus in country they were silent and didn’t even care to react, and now making issue out of it only displays their double standards.

Sunday, July 2, 2017

Truth behind Mob lynchings in India

Two dalits lynched by mob of Muslims in Bihar, but electronic media will not cover it, no social media campaign and hashtags would be trended for them, because that would mean that media will have to reveal that culprits are muslims, and that will not suite the anti-Hindu agenda of our media,

Neither the dalit thinkers, activists will condemn the incident, nor the media moughals who preach sermon of freedom of expression, and even the communists & secular intellectual gangs who ran the nautanki of #NotInMyName  and claim to be the voice of oppressed have spoken a word against this incident,

Design is simple pick only those issues where the victim is muslim and there are Hindus on the other side, and then spin the story in such a way that it gives feel that Hindu was on fault, give it communal colour put fake angle like beef, and now defame and abuse Hindus because it was consolidation of Hindu votes which brought Modi Govt in power, so media and anti-Hindu brigade is going after the real power and attacking the roots from where Modi Govt derives it's power.


Tuesday, April 25, 2017

Why Indian Army is the right weapon to deal with Maoist rather than CRPF

Using CRPF to deal with Maoist is wrong strategy and is meant to backfire, Indian Army is the right weapon to deal with Maoist because other than COBRA commandos CRPF is neither fully prepared nor equipped & doesn’t have the autonomy which is required to deal with these Maoists


CRPF is Central Reserve Police Force, they are deployed anywhere and everywhere within the country be it search & rescue operations, conducting elections, maintaining law & order situation in cities and villages in cases of riots or some other mishap, organizing an event and its security, but jungle warfare with Maoist in difficult terrains is something completely different,  other than COBRA commandos of CRPF its men are not properly trained for jungle & guerrilla warfare, and CRPF doesn’t have COBRA commandos in such a large number who can take on widespread Maoist in various states of the country.


CRPF lacks highly advanced and sophisticated weapons, equipment and gears which Indian Army and other commando-SF carries,


Biggest drawback with CRPF dealing with Maoist is that CRPF is accountable & answerable to state govt and has to work in sync with local police, CRPF men could be tried in court and they could even lose their jobs, and human rights lobbies have shown us how they destroy lives of these poor men in uniform just because they performed their duty, whereas Army enjoys immunity & autonomy given to them by law of the land, state and local police can't interfere in their job, and they are not answerable to them, which is the biggest advantage and edge which Indian Army has over CRPF in dealing with tough situation.

Indian army is well equipped with expertise, weapons, equipment and gears, has well trained units in jungle & mountain warfare who are expert in guerrilla warfare as well, Indian Army has its own Air wing, army can even take help from special forces like GHATAK (shock troops) which it commands and even Special Frontier Force which isn’t even answerable to parliament but only to Indian Union’s Cabinet Secretariat and is controlled by RAW (Research & Analysis Wing)

with such lethal and potent options available what is the point in risking lives of our CRPF men when they are not yet ready to deal with the challenge.

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